पद्मश्री योगेश प्रवीण से बातचीत: 'लखनऊ के चलते-फिरते इनसाइक्लोपीडिया' की कहानी
लखनऊ के इतिहास की बात हो और योगेश प्रवीण का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है। अवध और लखनऊ पर दर्जनों किताबें लिखने वाले इस लेखक को लोग प्यार से 'लखनऊ का चलता-फिरता इनसाइक्लोपीडिया' कहते थे। अक्टूबर 2020 में वॉक्सी टॉक्सी संवाद में उनसे लंबी बातचीत हुई थी।
वीडियो में क्या है
यह वीडियो 22 अक्टूबर 2020 को अपलोड हुआ, यानी उसी साल जनवरी 2020 में घोषित पद्मश्री सम्मान के कुछ महीनों बाद। प्रस्तोता आयुष तिवारी योगेश प्रवीण का स्वागत करते हैं और वे शुरुआत लखनऊ पर लिखी शायरी से करते हैं। वे बताते हैं कि उनका परिवार पढ़ा-लिखा था, शुरुआत में उनका झुकाव विज्ञान और डॉक्टरी की ओर था, लेकिन हालात ने उन्हें साहित्य और इतिहास की राह पर ला दिया और वे कॉलेज में हिंदी के प्राध्यापक बने। वे अपने लेखन की शुरुआत, पहले कहानी संग्रह और लखनऊ पर लिखने के सिलसिले की बात करते हैं। वीडियो के विवरण के अनुसार बातचीत में यह भी आता है कि उनकी राय में लखनऊ का इतिहास अब तक ठीक से क्यों नहीं लिखा गया, और नई पीढ़ी को अपनी धरोहर से जोड़ना क्यों ज़रूरी है।
योगेश प्रवीण: एक परिचय
- जन्म: 1938 में (जन्म की तारीख़ स्रोतों में अलग-अलग मिलती है)।
- शिक्षा: हिंदी और संस्कृत में एमए, मेरठ विश्वविद्यालय से साहित्य में डॉक्टरेट।
- सम्मान: साल 2020 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। 'लखनऊ नामा' के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।
- निधन: 12 अप्रैल 2021 को लखनऊ में, 82 वर्ष की उम्र में। यानी यह बातचीत उनके जीवन के आख़िरी साल की है।
उनकी प्रमुख किताबें
- दास्ताने अवध
- ताजदारे अवध
- बहारे अवध
- गुलिस्ताने अवध
- दास्ताने लखनऊ
- आपका लखनऊ
- लखनऊ नामा
उन्होंने 1978 की फ़िल्म 'जुनून' के लिए गीत भी लिखे थे। उनकी किताबें नवाबी दौर की इमारतों, किस्सों, खान-पान और तहज़ीब को आम पाठक की भाषा में सामने लाती हैं, इसलिए लखनऊ घूमने वाले और शोध करने वाले, दोनों उन्हें पढ़ते हैं।
आज के पाठकों के लिए
- लखनऊ की विरासत को समझना हो तो उनकी किताबें शहर की सार्वजनिक और विश्वविद्यालय लाइब्रेरी में खोजी जा सकती हैं।
- किसी इमारत या किस्से के बारे में पढ़ते समय यह ध्यान रखें कि कई कहानियाँ परंपरा और लोक-स्मृति पर आधारित हैं; ऐतिहासिक तारीख़ों के लिए अभिलेख और पुरातत्व विभाग की जानकारी भी देखें।
- पूरा संवाद योगेश प्रवीण की अपनी आवाज़ में सुनने के लिए ऊपर दिया गया वीडियो देखें।



