मेरठ के क्रिकेट बैट और बॉल कैसे बनते हैं: वॉक्सी टॉक्सी की 2021 की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश का मेरठ देश के सबसे बड़े खेल-सामान केंद्रों में गिना जाता है। यहाँ बने क्रिकेट बैट, बॉल, पैड और ग्लव्स देश-विदेश में बिकते हैं। सितंबर 2021 में, जब आईपीएल चल रहा था, वॉक्सी टॉक्सी ने मेरठ के एक क्रिकेट-सामान निर्माता के स्टॉल पर जाकर समझा कि बैट और बॉल कैसे बनते हैं।
वीडियो में क्या है
यह वीडियो 25 सितंबर 2021 को अपलोड हुआ, जब आईपीएल 2021 का दूसरा चरण चल रहा था। स्टॉल पर मौजूद कंपनी के प्रतिनिधि बताते हैं कि वे बैट, पैड, ग्लव्स, हेलमेट समेत क्रिकेट से जुड़ा लगभग हर सामान बनाते हैं, और उनका दावा है कि दिनेश चांदीमल, इयोन मॉर्गन, सरफ़राज़ ख़ान और विष्णु विनोद जैसे खिलाड़ी उनका सामान इस्तेमाल करते हैं। वे बताते हैं कि अच्छे बैट के लिए इंग्लिश विलो की लकड़ी इंग्लैंड से मँगाई जाती है, और एक बैट तैयार होने में कम से कम 10 दिन लगते हैं, जबकि लेदर बॉल को रंगाई, सिलाई और क्वालिटी जाँच के बाद तैयार होने में लगभग 15 दिन। उनके अनुसार क्वालिटी जाँच मशीनों से होती है और दिखाया गया बैट लगभग 3,000 रुपये का था।
मेरठ: खेल-सामान का बड़ा केंद्र
मेरठ में एसजी, एसएस, पीआर और भल्ला इंटरनेशनल जैसी कई जानी-मानी कंपनियाँ क्रिकेट का सामान बनाती हैं। 2025 की आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफ़ी के दौरान भी मेरठ में बने बैट कई खिलाड़ियों के हाथों में दिखे। इस उद्योग से हज़ारों कारीगरों और छोटे कारख़ानों को रोज़गार मिलता है।
इंग्लिश विलो बनाम कश्मीर विलो
- इंग्लिश विलो: हल्की और ज़्यादा लचीली लकड़ी, जिससे गेंद अच्छी उछलती है। पेशेवर खिलाड़ी आम तौर पर इसी के बैट इस्तेमाल करते हैं, और यह महँगी होती है।
- कश्मीर विलो: कश्मीर घाटी में उगने वाली, कुछ भारी और सख़्त लकड़ी। यह सस्ती होती है और क्लब व शौक़िया खिलाड़ियों में लोकप्रिय है।
क्रिकेट के नियमों के अनुसार बैट की लंबाई अधिकतम 38 इंच और ब्लेड की चौड़ाई अधिकतम 4.25 इंच हो सकती है।
बैट या बॉल खरीदते समय ध्यान दें
- अपनी लंबाई और खेलने के स्तर के हिसाब से बैट का साइज़ और वज़न चुनें; बहुत भारी बैट से चोट का ख़तरा बढ़ता है।
- नए बैट को इस्तेमाल से पहले तेल लगाकर और पुरानी गेंद से 'नॉकिंग' करके तैयार करें, ताकि वह जल्दी न टूटे।
- लेदर बॉल में सिलाई और सीम की मज़बूती देखें; टेनिस-बॉल क्रिकेट के लिए हल्का बैट बेहतर रहता है।
- पक्का बिल लें और कंपनी की वारंटी या रिप्लेसमेंट नीति पूछ लें।
किसी ब्रांड के बारे में खिलाड़ियों के इस्तेमाल के दावे कंपनी के अपने हैं; खरीदने से पहले सामान को ख़ुद परख लें।



