प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण: यूपी में किसे मिलता है घर, कितनी मदद और स्टेटस कैसे देखें

उत्तर प्रदेश के गाँवों में पक्का घर पाने का सबसे बड़ा सहारा प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) है। गूगल ट्रेंड्स पर "आवास" से जुड़ी खोजें बढ़ने के बीच यहाँ योजना की बुनियादी जानकारी और अपना स्टेटस देखने का तरीक़ा दिया जा रहा है।
यूपी के लिए ताज़ा मंज़ूरी
जून 2026 में केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए पीएमएवाई-जी के तहत 6.18 लाख से अधिक नए पक्के घरों को मंज़ूरी दी। यह घोषणा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाक़ात के बाद हुई। इन घरों का आवंटन पात्रता सूची और ग्राम सभा के सत्यापन के आधार पर होता है।
योजना की मुख्य बातें
- पीएमएवाई-जी में मैदानी इलाक़ों में घर बनाने के लिए ₹1.20 लाख और पहाड़ी व दुर्गम इलाक़ों में ₹1.30 लाख की सहायता दी जाती है।
- पैसा सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में किस्तों में आता है और हर चरण में घर की जियो-टैग फ़ोटो से प्रगति की जाँच होती है।
- अगस्त 2024 में केंद्रीय कैबिनेट ने योजना को आगे बढ़ाते हुए 2024-25 से 2028-29 के बीच 2 करोड़ अतिरिक्त ग्रामीण घर बनाने को मंज़ूरी दी थी।
- नए पात्र परिवारों की पहचान के लिए "आवास+ 2024" सर्वे मोबाइल ऐप के ज़रिए किया गया, जिसमें स्व-सर्वेक्षण का विकल्प भी दिया गया।
कौन पात्र है
आम तौर पर वे ग्रामीण परिवार पात्र होते हैं जिनके पास पक्का घर नहीं है या जो कच्चे/जर्जर मकान में रहते हैं। जिनके पास पहले से पक्का मकान है, या जो कुछ तय मानदंडों — जैसे आयकर दाता होना या सरकारी नौकरी — में आते हैं, वे योजना से बाहर रहते हैं। अंतिम पात्रता सूची ग्राम सभा में पढ़ी जाती है, इसलिए ग्राम सभा की बैठक में ज़रूर जाएँ।
अपना स्टेटस कैसे देखें
- आधिकारिक वेबसाइट pmayg.nic.in खोलें।
- मेन्यू में "Stakeholders" पर जाकर "IAY/PMAYG Beneficiary" चुनें।
- अपना रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर सबमिट करें; इससे स्वीकृति, किस्तों और निर्माण की स्थिति दिख जाएगी।
- रजिस्ट्रेशन नंबर न होने पर "Advanced Search" में राज्य, ज़िला, ब्लॉक, ग्राम पंचायत और नाम भरकर खोज सकते हैं।
- "आवास ऐप" या "आवास+" ऐप से भी जानकारी मिल सकती है।
दिक़्क़त आए तो क्या करें
नाम सूची में न हो या किस्त अटकी हो तो ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम रोज़गार सेवक या ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कार्यालय से संपर्क करें। बैंक खाते का आधार से जुड़ा होना और सही आईएफ़एससी कोड होना ज़रूरी है। योजना के नाम पर पैसे माँगने वाले किसी भी बिचौलिये से सावधान रहें — आवेदन और चयन की प्रक्रिया में कोई शुल्क नहीं लगता। शिकायत होने पर उसे ब्लॉक कार्यालय में लिखित रूप में दें और रसीद लें।

