लखनऊ का अलीगंज हनुमान मंदिर: बड़े मंगल की परंपरा और नवाबी दौर की कहानी
लखनऊ में ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को "बड़ा मंगल" कहा जाता है। इन दिनों शहर भर में भंडारे लगते हैं और हनुमान मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ती है। इस परंपरा की कहानी सबसे ज़्यादा अलीगंज के हनुमान मंदिर से जुड़ी है, जिसे वॉक्सी टॉक्सी ने 2021 में कोरोना काल के दौरान दिखाया था।
वीडियो में क्या है
यह वीडियो 1 जून 2021 को, ज्येष्ठ महीने के पहले बड़े मंगल पर, लखनऊ के नया अलीगंज हनुमान मंदिर में फ़िल्माया गया। रिपोर्टर बताते हैं कि कोविड-19 की पाबंदियों के कारण उस साल शहर में हर साल होने वाले भंडारे नहीं हो रहे थे और मंदिर में लोगों की आवाजाही सीमित रखी गई थी। वीडियो में मंदिर से जुड़ी दो प्रचलित कहानियाँ सुनाई जाती हैं — एक यह कि लक्ष्मण जी जब माता सीता को वाल्मीकि आश्रम ले जा रहे थे तो रात में यहीं रुके थे, और दूसरी यह कि अवध की एक बेगम ने संतान की मन्नत माँगी, सपने में हनुमान जी ने ज़मीन में दबी मूर्ति के बारे में बताया और खुदाई के बाद मंदिर बना। वीडियो इस मंदिर को लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल के रूप में पेश करता है।
मंदिर का इतिहास: स्रोत क्या कहते हैं
लखनऊ ज़िला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार अलीगंज का हनुमान मंदिर नवाब शुजाउद्दौला की पत्नी आलिया बेगम से जुड़ा है, और उन्हीं के सम्मान में इस इलाक़े का नाम अलीगंज पड़ा। प्रचलित कथा के अनुसार मूर्ति को हाथी पर ले जाया जा रहा था, लेकिन हाथी एक जगह रुक गया और वहीं मंदिर बनवाया गया। मंदिर बनने के बाद यहाँ मेला लगने लगा, जो आगे चलकर बड़े मंगल की पहचान बन गया।
ध्यान रहे कि इन कहानियों के अलग-अलग रूप मिलते हैं — कहीं बेगम का नाम जनाब-ए-आलिया लिखा मिलता है तो कहीं किसी दूसरे नवाब की बेगम का ज़िक्र आता है। मंदिर के निर्माण का सटीक वर्ष भी स्रोतों में एक जैसा नहीं मिलता। इसलिए इन्हें आस्था और लोक-परंपरा के रूप में समझना बेहतर है।
बड़ा मंगल क्यों ख़ास है
- बड़ा मंगल हिंदी महीने ज्येष्ठ के सभी मंगलवारों को मनाया जाता है, जो आम तौर पर मई-जून में पड़ते हैं।
- इन दिनों लखनऊ की सड़कों पर जगह-जगह पूड़ी-सब्ज़ी, शरबत और प्रसाद के भंडारे लगते हैं, जिनमें हर धर्म के लोग हिस्सा लेते हैं।
- पुराने हनुमान मंदिर का शिखर और यहाँ की परंपराएँ लखनऊ की साझा संस्कृति का प्रतीक मानी जाती हैं।
जाने वालों के लिए सुझाव
बड़े मंगल पर अलीगंज के मंदिर में सुबह से देर रात तक लंबी कतारें रहती हैं, इसलिए सुबह जल्दी पहुँचना अच्छा रहता है। आसपास यातायात बदला जाता है, इसलिए निकलने से पहले लखनऊ पुलिस की ट्रैफ़िक एडवाइज़री देख लें। भंडारा लगाने वालों को स्वच्छता और प्लास्टिक के कम इस्तेमाल का ध्यान रखना चाहिए।



