लखनऊ से · 2018 से
जनता की आवाज़
ट्रेंडिंग
यूपीएससी मेन्स रिज़ल्ट 2026: 2,526 उम्मीदवार इंटरव्यू में, 11–25 नवंबर तक भरना होगा फ़ॉर्मधनतेरस 2026: 6 नवंबर को पूजा का शुभ मुहूर्त, त्रयोदशी तिथि और ख़रीदारी का समयप्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण: यूपी में किसे मिलता है घर, कितनी मदद और स्टेटस कैसे देखेंचक्रवात अर्नब: यूपी में 28 से 31 अक्टूबर तक बारिश-आंधी का अलर्ट, जानें किन ज़िलों पर असरपीएम किसान 24वीं किस्त: 30 अक्टूबर 2026 को जारी हुए ₹2,000, ऐसे चेक करें अपना स्टेटसCBSE डेट शीट 2027: कक्षा 10 और 12 का टाइम टेबल कब आएगा, अब तक क्या पता हैरामायण फ़िल्म: रणबीर राम, साई पल्लवी सीता और यश रावण — रिलीज़, कास्ट और पहले दिन की कमाई69000 शिक्षक भर्ती : 6800 Reservation बेसिक शिक्षा मंत्री आवास का घेराव करने के बाद क्या बोले?क्यों ये लोग मोदी, अमित शाह से आशीर्वाद लेने 532 km लखनऊ से दिल्ली तक पैदल जा रहे हैं?शशि थरूर क्यों दे रहे हैं सफाई? | Shashi Tharoor | Lok Sabha | Supriya SuleCM Yogi Adityanath के Bulldozer Baba वाली बात पर Akhilesh Yadav ने ये कहा | Jankipuram VistarLucknow university : जाने पुराने समय के पेड़ और पत्थरों की क्या खासियत थी ?यूपीएससी मेन्स रिज़ल्ट 2026: 2,526 उम्मीदवार इंटरव्यू में, 11–25 नवंबर तक भरना होगा फ़ॉर्मधनतेरस 2026: 6 नवंबर को पूजा का शुभ मुहूर्त, त्रयोदशी तिथि और ख़रीदारी का समयप्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण: यूपी में किसे मिलता है घर, कितनी मदद और स्टेटस कैसे देखेंचक्रवात अर्नब: यूपी में 28 से 31 अक्टूबर तक बारिश-आंधी का अलर्ट, जानें किन ज़िलों पर असरपीएम किसान 24वीं किस्त: 30 अक्टूबर 2026 को जारी हुए ₹2,000, ऐसे चेक करें अपना स्टेटसCBSE डेट शीट 2027: कक्षा 10 और 12 का टाइम टेबल कब आएगा, अब तक क्या पता हैरामायण फ़िल्म: रणबीर राम, साई पल्लवी सीता और यश रावण — रिलीज़, कास्ट और पहले दिन की कमाई69000 शिक्षक भर्ती : 6800 Reservation बेसिक शिक्षा मंत्री आवास का घेराव करने के बाद क्या बोले?क्यों ये लोग मोदी, अमित शाह से आशीर्वाद लेने 532 km लखनऊ से दिल्ली तक पैदल जा रहे हैं?शशि थरूर क्यों दे रहे हैं सफाई? | Shashi Tharoor | Lok Sabha | Supriya SuleCM Yogi Adityanath के Bulldozer Baba वाली बात पर Akhilesh Yadav ने ये कहा | Jankipuram VistarLucknow university : जाने पुराने समय के पेड़ और पत्थरों की क्या खासियत थी ?
वीडियो

बेगम हज़रत महल: 1857 में लखनऊ से अंग्रेज़ों को चुनौती देने वाली अवध की रानी

1857 की पहली आज़ादी की लड़ाई में जिन महिलाओं ने नेतृत्व किया, उनमें अवध की बेगम हज़रत महल का नाम प्रमुख है। लखनऊ के हज़रतगंज में उनके नाम का पार्क है, लेकिन उनकी कहानी अक्सर उतनी याद नहीं की जाती जितनी होनी चाहिए।

वीडियो में क्या है

यह वीडियो 7 अप्रैल 2021 को, बेगम हज़रत महल की पुण्यतिथि पर, लखनऊ के बेगम हज़रत महल पार्क से अपलोड किया गया। इस वीडियो का ट्रांसक्रिप्ट उपलब्ध नहीं है; वीडियो के विवरण के अनुसार इसमें बताया गया है कि बेगम हज़रत महल को अवध की "राजमाता" क्यों कहा जाता है, भारत की आज़ादी की लड़ाई में उनका क्या योगदान था, और यह सवाल उठाया गया है कि दूसरे क्रांतिकारियों की तरह उनके प्रति भी सरकारें उदासीन क्यों रहीं। वीडियो में पार्क और वहाँ बने स्मारक के दृश्य हैं।

बेगम हज़रत महल: प्रमुख तथ्य

  • उनका जन्म लगभग 1820 में फ़ैज़ाबाद में हुआ बताया जाता है। उनका बचपन का नाम मुहम्मदी ख़ानम था।
  • वे अवध के आख़िरी नवाब वाजिद अली शाह की पत्नी थीं। फ़रवरी 1856 में अंग्रेज़ों ने अवध पर क़ब्ज़ा किया और नवाब को कलकत्ता भेज दिया गया।
  • 1857 के विद्रोह के दौरान उन्होंने अपने नाबालिग बेटे बिरजिस क़द्र को अवध का शासक घोषित कराया और उनकी संरक्षक के रूप में 1857–1858 में शासन संभाला।
  • लखनऊ की लड़ाई में उन्होंने विद्रोही सेनाओं का नेतृत्व किया। अंग्रेज़ों के लखनऊ पर दोबारा क़ब्ज़ा करने के बाद वे नेपाल चली गईं, जहाँ जंग बहादुर राणा ने शुरुआती इनकार के बाद उन्हें शरण दी।
  • अंग्रेज़ों की धार्मिक आज़ादी की घोषणाओं पर तंज़ करती उनकी एक घोषणा उस दौर के महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों में गिनी जाती है।
  • 7 अप्रैल 1879 को काठमांडू में उनका निधन हुआ। उन्हें वहाँ की जामा मस्जिद परिसर में दफ़नाया गया।

सम्मान और स्मारक

15 अगस्त 1962 को लखनऊ के हज़रतगंज स्थित पुराने विक्टोरिया पार्क में उन्हें सम्मानित किया गया और यह पार्क उनके नाम से जाना जाने लगा। वहाँ संगमरमर का एक स्मारक है, जिस पर अवध के शाही चिह्न वाली पीतल की पट्टिकाएँ लगी हैं। भारत सरकार ने 10 मई 1984 को उनकी याद में डाक टिकट जारी किया।

आज की पीढ़ी के लिए

  • बेगम हज़रत महल पार्क हज़रतगंज के पास है; यहाँ स्मारक देखकर 1857 के इतिहास से जुड़ाव महसूस किया जा सकता है।
  • लखनऊ की रेज़ीडेंसी, जहाँ 1857 की घेराबंदी हुई थी, इस इतिहास को समझने के लिए अगला पड़ाव हो सकती है।
  • स्कूलों और कॉलेजों के लिए 7 अप्रैल का दिन उनके योगदान पर चर्चा का अच्छा अवसर है।

YouTube पर देखें →

V

VoxyTalksy Desk

वॉक्सी टॉक्सी की संपादकीय टीम, लखनऊ

और वीडियो

सभी देखें →