कुंभ मेला: कितने प्रकार के होते हैं कुंभ और ये चार ही जगहों पर क्यों लगते हैं
कुंभ मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक जमावड़ों में गिना जाता है। अप्रैल 2021 में जब हरिद्वार में कुंभ चल रहा था, तब वॉक्सी टॉक्सी ने एक छोटे वीडियो में समझाया कि कुंभ क्या है और यह इन्हीं चार जगहों पर क्यों लगता है।
वीडियो में क्या है
यह वीडियो 12 अप्रैल 2021 को अपलोड हुआ, जब उत्तराखंड के हरिद्वार में कुंभ चल रहा था। प्रस्तोता आयुष तिवारी बताते हैं कि 2017 में कुंभ को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल किया गया। वे अर्धकुंभ, कुंभ और महाकुंभ का अंतर समझाते हैं और बताते हैं कि मेला प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में लगता है। इसके बाद समुद्र मंथन की पौराणिक कथा सुनाई जाती है — अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष में अमृत की बूँदें इन चार जगहों पर गिरीं, और 12 दिनों का यह संघर्ष धरती के 12 वर्षों के बराबर माना गया। वीडियो के आख़िर में 2021 के हरिद्वार कुंभ के स्नान पर्वों का ज़िक्र है।
चार स्थान और नदियाँ
- प्रयागराज: गंगा, यमुना और (मान्यता के अनुसार) सरस्वती का संगम
- हरिद्वार: गंगा
- नासिक-त्र्यंबकेश्वर: गोदावरी
- उज्जैन: शिप्रा
इन जगहों पर कुंभ का समय बृहस्पति, सूर्य और चंद्रमा की ज्योतिषीय स्थिति से तय किया जाता है। नासिक और उज्जैन के कुंभ को सिंहस्थ भी कहा जाता है।
कुंभ के प्रकार
- अर्धकुंभ: लगभग हर छह साल पर, प्रयागराज और हरिद्वार में।
- पूर्ण कुंभ: हर 12 साल पर।
- महाकुंभ: प्रचलित मान्यता के अनुसार 12 पूर्ण कुंभों के बाद, यानी 144 साल पर, प्रयागराज में। 2019 के प्रयागराज आयोजन से उत्तर प्रदेश सरकार ने अर्धकुंभ को "कुंभ" और 12 वर्षीय आयोजन को "महाकुंभ" कहना शुरू किया।
हाल का और आने वाला कुंभ
प्रयागराज में महाकुंभ 13 जनवरी 2025 से 26 फ़रवरी 2025 तक चला, जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं ने स्नान किया। आगे के आयोजनों में हरिद्वार का अर्धकुंभ 2027 में, नासिक-त्र्यंबकेश्वर का सिंहस्थ कुंभ 2027 में और उज्जैन का सिंहस्थ 2028 में प्रस्तावित है। इनकी आधिकारिक स्नान तिथियाँ संबंधित राज्य सरकारें और अखाड़ा परिषद घोषित करती हैं।
श्रद्धालुओं के लिए सुझाव
- यात्रा से पहले मेला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर स्नान तिथियाँ, यातायात योजना और पार्किंग की जानकारी देखें।
- प्रमुख स्नान पर्वों पर भीड़ बहुत अधिक होती है; बुज़ुर्गों और बच्चों के साथ जाएँ तो पहचान पत्र और संपर्क नंबर साथ रखें।
- प्रशासन द्वारा तय घाटों पर ही स्नान करें और गंगा-यमुना को साफ़ रखने में सहयोग करें।



