नवाब जाफ़र मीर अब्दुल्ला से समझिए लखनवी आदाब और वाजिद अली शाह की तहज़ीब
लखनऊ की पहचान उसकी इमारतों और खाने के साथ-साथ उसकी तहज़ीब से भी है। झुककर, हाथ उठाकर किया जाने वाला "आदाब" इस तहज़ीब का सबसे जाना-पहचाना रूप है। वॉक्सी टॉक्सी की एक ख़ास सीरीज़ के पहले भाग में इसी पर बात हुई।
वीडियो में क्या है
यह वीडियो 1 अप्रैल 2021 को अपलोड हुआ और इसमें लखनऊ के नवाब जाफ़र मीर अब्दुल्ला से बातचीत है, जिनका परिवार नवाबी दरबार से जुड़ा रहा है। वे पुराने और आज के लखनऊ के फ़र्क़ पर बात करते हैं और कहते हैं कि अलग-अलग धर्मों के लोग अपने-अपने ढंग से अभिवादन करते थे — कोई अस्सलामु अलैकुम कहता, कोई नमस्कार, जय सियाराम या राधे-राधे। उनके अनुसार नवाब वाजिद अली शाह ने समाज को एक साझा अभिवादन "आदाब" दिया, ताकि लोग मज़हब से नहीं, अदब से पहचाने जाएँ। वे दुपल्ली टोपी और उस दौर के पहनावे का उदाहरण देकर बताते हैं कि तब पहनावे से यह पता नहीं चलता था कि कोई किस धर्म का है। यह आदाब की उत्पत्ति के बारे में उनकी अपनी व्याख्या है।
वाजिद अली शाह कौन थे
नवाब वाजिद अली शाह का जन्म 30 जुलाई 1822 को लखनऊ में हुआ था। वे अवध के आख़िरी बादशाह थे और 1847 में गद्दी पर बैठे। फ़रवरी 1856 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अवध को अपने राज्य में मिला लिया, जिसके बाद वे कलकत्ता (अब कोलकाता) के मटियाबुर्ज में रहने लगे। वहीं 1 सितंबर 1887 को उनका निधन हुआ। संगीत, कथक, ठुमरी और रंगमंच को संरक्षण देने के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है। उनकी बेगम हज़रत महल ने 1857 की लड़ाई में लखनऊ में अंग्रेज़ों का मुक़ाबला किया था।
आदाब: अभिवादन का तरीक़ा
- आदाब शब्द "अदब" का बहुवचन है, जिसका अर्थ है शिष्टाचार और सम्मान।
- आदाब करते समय दाहिना हाथ माथे की ओर उठाकर हल्का झुका जाता है; जवाब में भी आदाब ही कहा जाता है।
- यह अभिवादन किसी एक धर्म से बंधा नहीं माना जाता, इसलिए लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक बन गया।
- आदाब की शुरुआत किसने और कब की, इस पर लिखित ऐतिहासिक प्रमाण कम हैं; वाजिद अली शाह से इसका रिश्ता मुख्यतः मौखिक परंपरा में बताया जाता है।
आज के लखनऊ के लिए सीख
नवाब जाफ़र मीर अब्दुल्ला की बातों का सार यह है कि तहज़ीब किताबों से ज़्यादा बड़ों से सीखी जाती है। "पहले आप" वाली नफ़ासत, बोलचाल की नरमी और मेहमाननवाज़ी को बचाए रखना ही लखनऊ की असली विरासत है। नई पीढ़ी के लिए यह वीडियो उसी विरासत से परिचय कराने की एक कोशिश है।



