हुसैनाबाद घंटाघर, लखनऊ: देश के सबसे ऊँचे क्लॉक टावर की कहानी
पुराने लखनऊ में बड़े इमामबाड़े और रूमी दरवाज़े के पास खड़ा हुसैनाबाद घंटाघर शहर की सबसे पहचानी जाने वाली इमारतों में है। इसे भारत का सबसे ऊँचा क्लॉक टावर माना जाता है।
वीडियो में क्या है
यह वीडियो अक्टूबर 2020 में वॉक्सी टॉक्सी की लखनऊ सीरीज़ के तहत अपलोड हुआ। रिपोर्टर आयुष तिवारी कैमरापर्सन शुभम के साथ घंटाघर पर पहुँचते हैं और बताते हैं कि यह देश का सबसे बड़ा क्लॉक टावर है, जिसकी ऊँचाई करीब 221 फ़ुट बताई जाती है। वे घड़ी की सुइयों के डिज़ाइन, ऊपर लगी चिड़िया जैसी आकृति के बारे में यह प्रचलित बात कि वह कभी सोने की हुआ करती थी, और घड़ी के लंबे समय तक बंद रहने व बाद में मरम्मत की बात करते हैं। वीडियो में घंटाघर के सौंदर्यीकरण और सामने के इलाक़े का भी ज़िक्र है। वीडियो में बोले गए कुछ वर्ष स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए नीचे सत्यापित तथ्य दिए गए हैं।
घंटाघर: प्रमुख तथ्य
- इसका निर्माण उन्नीसवीं सदी के आख़िर में, 1881 के आसपास हुआ। इसे उत्तर-पश्चिमी प्रांत के लेफ़्टिनेंट गवर्नर सर जॉर्ज कूपर के आगमन की याद में बनवाया गया बताया जाता है।
- इसके वास्तुकार रिचर्ड रॉस्केल बेन थे। इमारत में विक्टोरियन और गोथिक शैली के तत्व दिखते हैं।
- इसकी ऊँचाई लगभग 67 मीटर (करीब 219–221 फ़ुट) बताई जाती है।
- घड़ी के पुर्ज़े गनमेटल के हैं और इसका पेंडुलम लगभग 14 फ़ुट लंबा है।
- निर्माण की लागत 1.75 लाख रुपये बताई जाती है।
कुछ स्रोतों में घंटाघर के बनने का समय और बनवाने वाले के नाम को लेकर अलग-अलग बातें मिलती हैं, इसलिए यहाँ वही बातें दी गई हैं जिन पर ज़्यादातर स्रोत सहमत हैं।
27 साल बाद फिर बजी घड़ी
घंटाघर की घड़ी कई दशकों तक बंद पड़ी रही। 2010 में ज़िला प्रशासन ने इसकी घड़ी बदलने पर विचार किया, लेकिन कुछ उत्साही लोगों ने पुरानी घड़ी की ही मरम्मत का प्रस्ताव दिया। अप्रैल 2010 में काम शुरू हुआ और 13 सितंबर 2011 को, क़रीब 27 साल की ख़ामोशी के बाद, घड़ी फिर से बजी।
घूमने वालों के लिए
- घंटाघर के पास बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा, रूमी दरवाज़ा, हुसैनाबाद तालाब और पिक्चर गैलरी हैं — इन्हें एक ही दिन में देखा जा सकता है।
- शाम को रोशनी में घंटाघर और आसपास का इलाक़ा ख़ास सुंदर दिखता है।
- पुराने लखनऊ की गलियों में पार्किंग मुश्किल होती है, इसलिए ई-रिक्शा या मेट्रो से नज़दीकी स्टेशन तक जाना बेहतर है।



