डायल 112: यूपी पुलिस की आपात सेवा महिला सुरक्षा के लिए कैसे काम करती है
किसी मुसीबत में सबसे पहले कौन सा नंबर याद आता है? उत्तर प्रदेश में अब इसका जवाब है — 112। लखनऊ के हुनर हाट में लगे यूपी पुलिस के स्टॉल पर वॉक्सी टॉक्सी ने विस्तार से जाना कि 112 कैसे काम करता है और महिलाओं की सुरक्षा के लिए इसमें क्या व्यवस्था है। हमने यूपी एसटीएफ और यूपी एसडीआरएफ के काम के बारे में भी जानकारी ली।
डायल 100 से 112 तक
पहले उत्तर प्रदेश में पुलिस की आपात सेवा "डायल 100" के नाम से जानी जाती थी। 2019 में इसे राष्ट्रीय आपात नंबर 112 से जोड़ दिया गया, ताकि पुलिस, फ़ायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस जैसी सेवाएँ एक ही नंबर पर मिल सकें। अब पूरे देश में 112 को एक साझा आपात नंबर के रूप में विकसित किया जा रहा है।
कॉल करने पर क्या होता है
- आपकी कॉल लखनऊ स्थित केंद्रीय कंट्रोल रूम में पहुँचती है, जहाँ शिकायत दर्ज होती है।
- कॉल की लोकेशन के आधार पर सबसे नज़दीकी पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल (PRV) को भेजा जाता है।
- गाड़ियाँ जीपीएस से जुड़ी होती हैं, जिससे कंट्रोल रूम उनकी स्थिति पर नज़र रखता है।
महिलाओं के लिए ख़ास बातें
- रात में अकेले यात्रा कर रही महिलाएँ 112 पर सूचना देकर सुरक्षित घर पहुँचने में मदद माँग सकती हैं।
- छेड़छाड़ या फ़ोन पर परेशान करने के मामलों के लिए यूपी पुलिस की वीमेन पावर लाइन 1090 भी है।
- घबराहट में बोल न पा रहे हों तो भी कॉल करें — अपनी लोकेशन और स्थिति थोड़े शब्दों में बताएँ।
ज़रूरी सलाह
112 पर मज़ाक या झूठी कॉल न करें। इससे किसी और ज़रूरतमंद तक मदद पहुँचने में देरी होती है और झूठी सूचना देना क़ानूनन अपराध भी है। यह नंबर अपने परिवार, ख़ासकर बच्चों और बुज़ुर्गों को ज़रूर याद कराएँ।



