फ़ैक्ट चेक: क्या 5G टेस्टिंग से हुई पक्षियों की मौत और बढ़ा कोरोना?
अप्रैल-मई 2021 में जब देश कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहा था, उसी समय व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर एक संदेश तेज़ी से फैला। दावा किया गया कि देश में 5G टावरों की टेस्टिंग हो रही है, जिसकी "रेडिएशन" से लोग बीमार होकर मर रहे हैं और पक्षियों की चहचहाहट भी कम हो गई है। वॉक्सी टॉक्सी ने इस दावे की पड़ताल की।
दावा क्या था
- 5G टेस्टिंग से निकलने वाली तरंगें हवा को "ज़हरीला" बना रही हैं।
- इसी वजह से लोगों को साँस लेने में दिक्कत हो रही है और मौतें बढ़ी हैं।
- पक्षी मर रहे हैं और आसमान से गायब हो रहे हैं।
सच क्या है
ये सभी दावे झूठे हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) ने 10 मई 2021 को आधिकारिक बयान जारी कर साफ़ कहा कि 5G तकनीक और कोविड-19 के फैलने के बीच कोई संबंध नहीं है। विभाग ने यह भी बताया कि उस समय तक भारत में कहीं भी 5G नेटवर्क की टेस्टिंग शुरू ही नहीं हुई थी। यानी जिस टेस्टिंग को मौतों का कारण बताया जा रहा था, वह हो ही नहीं रही थी।
कोरोना एक वायरस से फैलने वाली बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क और हवा में मौजूद सूक्ष्म बूँदों से फैलती है। मोबाइल तरंगें वायरस को न पैदा कर सकती हैं, न फैला सकती हैं। दुनिया के कई ऐसे देशों में भी कोरोना तेज़ी से फैला जहाँ 5G नेटवर्क था ही नहीं।
पक्षियों की बात
शहरों में पक्षियों की संख्या घटने के असली कारण पेड़ों की कटाई, घोंसलों की जगह कम होना, कीटनाशक और प्रदूषण हैं। किसी एक मोबाइल तकनीक को इसका कारण बताने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
आप क्या करें
कोई भी डराने वाला संदेश आगे भेजने से पहले उसकी पुष्टि ज़रूर करें। सरकारी विभागों के आधिकारिक बयान और भरोसेमंद फ़ैक्ट-चेक वेबसाइटें देखें। अफ़वाहें महामारी के समय सबसे ज़्यादा नुकसान करती हैं।



