भारतीय कमेंटरी की आवाज़ जसदेव सिंह नहीं रहे

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भारतीय कमेंटरी की आवाज़ जसदेव सिंह नहीं रहे

भारतीय खेल की जानी मानी आवाज़ जसदेव सिंह का मंगलवार को लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 87 वर्ष के थे। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं। अपने पांच दशक के करियर में उन्होंने 9 ओलम्पिक, 8 हॉकी विश्व कप, 6 एशियन गेम्स  और 45 से ज्यादा बार गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस की कमेंटरी की। आपको 1985 में पद्मश्री और 2008 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। जसदेव सिंह जी ने ओलम्पिक के 9 सत्रों में कमेंटरी की,  सं 2000  के मेलबर्न ओलम्पिक में उन्होंने ओलम्पिक खेलो में आखिरी बार कमेंटरी की। उनको सं 1988 के सोल ओलम्पिक में ओलम्पिक परिषद् के पूर्व प्रमुख जुआन ऐंटोनिओ समारांच ने ‘ओलम्पिक आर्डर’ से सम्मानित किया।

जानें कैसे बने वो कमेंटेटर 

अपने एक इंटरव्यू में जसदेव सिंह जी ने  बताया था कि जब 1948 में वो किशोरावस्था में थे तब मारविले डी मेलो ने महात्मा गाँधी के अंतिम संस्कार का लगातार 7 घंटे तक अंग्रेजी में कमेंटरी की, वहीँ से उनको प्रेरणा मिली, तभी उन्होंने निश्चय किया कि वो भी कमेंटेटर बनेंगे।

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