1. ब्राहमण आपको भगवान के नाम पर मुर्ख बनाकर अंधविश्वास में निष्ठा रखने के लिए तैयार करता है ओर स्वयं आरामदायक जीवन जी रहा है, तथा तुम्हे अछूत कहकर निंदा करता है। देवता की प्रार्थना करने के लिए दलाली करता है मै इस दलाली की निदा करता हूँ और आपको भी सावधान करता हूँ की ऐसे ब्राहमणों का विश्वास मत करो।
2. ब्राहमणों के पैरों में क्यों गिरना ? क्या ये मंदिर है ? क्या ये त्यौहार है ? नही , ये सब कुछ भी नही है। हमें बुद्धिमान व्यक्ति कि तरह व्यवहार करना चाहिए यही प्रार्थना का सार है।
3. ईश्वर को धुर्तों ने बनाया,गुण्डों ने लागू किया ,मुर्ख उसमें आस्था रखते हैं।
4. हमारे देश को आजादी तभी मिल गई समझाना चाहिए जब ग्रामीण लोग, देवता ,अधर्म , जाति ओर अंधविस्वास से छुटकारा पा जायेंगे।
5. जिन्होंने भगवान को बनाया वो धूर्त है , भगवन का प्रचार करने वाला नीच व दुष्ट है तथा भगवान की पूजा करने वाला अनपढ़ व गवांर हैं।
‘दाढ़ी वाला बाबा’-
पेरियार ई.वी. रामास्वामी जी के द्वारा शोषित,वंचित,पिछड़े लोगों के लिए चलाए गये दो महत्वपूर्ण आंदोलन-
1-”वायकोम सत्याग्रह” केरल.राज्य के वायकोम कस्बे में हालत इतनी खराब थी कि दक्षिण भारत के कई मंदिरों में निचली, शुद्र जातियों के लोगों को प्रवेश तो दूर उन्हें पास की सड़कों पर भी नहीं आने दिया जाता था वाईकॉम आन्दोलन का नेतृत्व भी स्वीकार किया उनकी पत्नी तथा दोस्तों ने भी इस आंदोलन में उनका साथ दिया। केरल में छूआछूत की जड़ें काफ़ी गहरी जमीं हुई थीं। यहाँ सवर्णों से अवर्णों को 16 से 32 फीट की दूरी बनाये रखनी होती थी। अवर्णों में ‘एझवा’ और ‘पुलैया’ अछूत जातियाँ शामिल थीं।
2-”आत्मसम्मान आंदोलन” पेरियार जी और उनके समर्थकों ने समाज से असमानता कम करने के लिए अधिकारियों और सरकार पर सदैव दबाव डाला। ‘आत्मसम्मान आन्दोलन’ का मुख्य लक्ष्य था द्रविड़ों को उनके सुनहरे अतीत पर अभिमान कराना। 1925 के बाद पेरियार ने ‘आत्म सम्मान आन्दोलन’ के प्रचार-प्रसार पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया। आन्दोलन के प्रचार के लिए एक तमिल साप्ताहिकी ‘कुडी अरासु’ (1925 में प्रारंभ) और अंग्रेजी जर्नल ‘रिवोल्ट’ (1928 में प्रारंभ) का प्रकाशन शुरू किया गया। इस आन्दोलन का लक्ष्य महज ‘सामाजिक सुधार’ नहीं बल्कि ‘सामाजिक आन्दोलन’ भी था।